कोविड-19 के लॉकडाउन के कारण दिल्ली के प्रवासी कामगारों को न तो नौकरी है और न ही सामाजिक सुरक्षा; विशेषज्ञ कानूनी संरक्षण और राजनीतिक उदासीनता को ज़िम्मेदार मानते हैं.

“बीमारी से लड़ें कि भूखमरी से. अच्छा किसको लगता है जान जोखिम में डाल कर खाना लेना. घर भी जाना चाहे तो उसके लिए भी पैसे नहीं हैं.”

कोरोना महामारी के समय दिल्ली के पंजीकृत निर्माण मजदूरों को नहीं मिल पा रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

दिल्ली में पंजीकृत मजदूरों की संख्या में लगातार कमी होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली श्रम कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हैं सिर्फ 46,000 पंजीकृत मजदूर जबकि 2015 में यह संख्या 3 लाख 17 हजार थी।